Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 6, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अद्य वर्तामहे नूनं धन्यानां धुरि धर्मतः ।
भवदागमनस्येमे यद्वयं लक्ष्यमागताः ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
निस्सन्देह आज हमने पुण्य से धन्य पुरुषों के आगे स्थान प्राप्त कर लिया है,
क्योंकि हम लोगों के उद्देश्य से आपका शुभागमन हुआ हे