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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verse 48

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 6, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 48

संस्कृत श्लोक

शुभक्षेत्रगतं चाहमात्मानमपकल्मषम् । चन्द्रबिम्ब इवोन्मग्नं वेदवेद्यविदांवर ॥ ४८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे तत्त्वज्ञशिरोमणे, आपके शुभागमन से मैं निष्पाप हो गया हूँ। अपने को पुण्यक्षेत्र में स्थित समझ रहा हूँ अर्थात्‌ आपके आगमन से मेरा गृह भी पवित्र हो गया हे । अधिक क्या कहूँ, मे अपने को अमृतमय चन्द्रमण्डल में निमग्न समञ्च रहा हूँ