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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verse 47

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 6, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 47

संस्कृत श्लोक

विगतेच्छाभयक्रोधो वीतरागो निरामयः । इदमत्यद्भुतं ब्रह्मन्यद्भवान्मामुपागतः ॥ ४७ ॥

हिन्दी अर्थ

पास आये हैं, यह बड़ी आश्चर्य की बात है