Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 7, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
श्रेयश्चास्य करिष्यामि बहुरूपमनन्तकम् ।
त्रयाणामपि लोकानां येन पूज्यो भविष्यति ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
मेँ भी निःसीम प्रभाव से युक्त और विविध अस्त्र, शस्त्र और विद्या देकर श्रीरामचन्द्र का कल्याण करूँगा ।
जिससे वे तीनों लोकों मे पूज्य हो जायेंगे