Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 7, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

न च ते राममासाद्य स्थातुं शक्ता निशाचराः । क्रुद्धं केसरिणं दृष्ट्वा वनेरण इवैणकाः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे क्रुद्ध सिंह को देखकर मृग वन में पैदा हुए इरिण की (तृणविशेष की) ओट में खड़े नहीं हो सकते, वैसे ही वे राक्षस श्रीराम के सामने खड़े नहीं हो सकते