Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verses 22–23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 7, verses 22–23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 22, 23
संस्कृत श्लोक
यदि धर्मो महत्त्वं च यशस्ते मनसि स्थितम् ।
तन्मह्यं समभिप्रेतमात्मजं दातुमर्हसि ॥ २२ ॥
दशरात्रश्च मे यज्ञो यस्मिन्रामेण राक्षसाः ।
हन्तव्या विघ्नकर्तारो मम यज्ञस्य वैरिणः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि धर्म, महत्ता और यश
की रक्षा करनी चाहिए, ऐसी आपकी वासना हो, तो मेरे इच्छित की सिद्धि के लिए श्रीरामचन्द्रजी को मुझे
दीजिए। रामचन्द्रजी जिस यज्ञ में मेरे यज्ञ के विघध्वंसक और सर्वविघ्नकारी राक्षसों को मारेंगे, मेरा यह
यज्ञ दस दिन में पूरा होगा