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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 26

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 7, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

कार्यमण्वपि काले तु कृतमेत्युपकारताम् । महदप्युपकारोऽपि रिक्ततामेत्यकालतः ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

समय पर थोड़ा भी कार्य किया जाय, तो वह बहुत उपकारक होता है। असमय में बहुत भी उपकार किया जाय, तो वह निष्फल जाता है