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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 7, Verse 27

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 7, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 7 · श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

इत्येवमुक्त्वा धर्मात्मा धर्मार्थसहितं वचः । विरराम महातेजा विश्वामित्रो मुनीश्वरः ॥ २७ ॥

हिन्दी अर्थ

धर्मात्मा महातेजस्वी मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्रजी यों धर्म-अर्थ से युक्त वाक्य कहकर चुप हो गये