Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 8, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
विप्रयुक्तो हि रामेण मुहूर्तमपि नोत्सहे ।
जीवितुं जीविताकांक्षी च रामं नेतुमर्हसि ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिवर, मैं जीने की इच्छा करता हूँ, लेकिन रामचन्द्र से क्षणभर के लिए भी वियुक्त होकर मैं जी
नहीं सकता