Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 8, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के वैराग्य प्रकरण, सर्ग 8, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 8 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
अद्यास्मिंस्तु वयं काले रावणादिषु शत्रुषु ।
न समर्थाः पुरः स्थातुं नियतेरेष निश्चयः ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
इस समय तो हम लोग रावण आदि शत्रुओं के सामने खड़े होने में सर्वथा असमर्थ
हैं, यह ईश्वरीय नियम ही हे