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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 11, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 11, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

तव चातिप्रसन्नेऽस्मिञ्जातं मनसि पावनम् । निर्निमित्तमिदं चारु वैराग्यमरिमर्दन ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

परन्तप, आपके अतिनिर्मल मन में “श्मशानमापदं दैन्यम्‌" इत्यादिसे आगे कहे जानेवाले दृष्ट निमित्तो के बिना ही पवित्रतम ज्ञानोत्पादन समर्थ वह उत्तम वैराग्य उत्पन्न हुआ हे