Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 11, Verse 73
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 11, verse 73 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 73
संस्कृत श्लोक
विकसितेन सितेन तमोमुचा वरविचारणशीतलरोचिषा ।
गुणवता हृदयेन विराजसे त्वममलेन नभः शशिना यथा ॥ ७३ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरी बुद्धि विकासयुक्त है या नहीं, यों सन्देह कर रहे श्रीरामचन्द्रजी को आश्वासन देते
हुए श्रीवसिष्ठजी कहते है ।
हे श्रीरामजी, आपभी विकसित, अज्ञान का त्याग कर रहे अतएव विशुद्ध शान्ति आदि
गुणों से शोभित एवं परमतत्त्व के विचार से शीतल बुद्धि से विराजमान हे