Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 13, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 13, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
आयान्ति च न चायान्ति प्रयान्ति च न यान्ति च ।
कुर्वन्त्यपि न कुर्वन्ति न वदन्ति वदन्ति च ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
वे अन्य लोगों की दृष्टि से आते
है और जाते हैं पर अपनी दृष्टि से न आते हैं ओर न जाते हैं, अन्य की दृष्टि से करते हुए एवं
बोलते हुए भी अपनी दृष्टि से न करते हैं और न बोलते हैं