Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 13, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 13, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
परित्यक्तसमस्तेहं मनोमधुरवृत्तिमत् ।
सर्वतः सुखमभ्येति चन्द्रबिम्ब इव स्थितम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण अभिलाषाओं से
रहित शान्तिपूर्ण तथा ब्रह्माकारत्व को प्राप्त मन चन्द्रबिम्ब में बैठे हुए स्वर्गी के समान चारों
ओर से सुख को प्राप्त होता हे