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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 13, Verse 7

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 13, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

अपि निर्मननारम्भमव्यस्ताखिलकौतुकम् । आत्मन्येव न मात्यन्तरिन्दाविव रसायनम् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

विषयों का बार-बार स्मरण करना और विषयों की प्राप्ति में कुतूहल ही विक्षेप के हेतु हैं, उनके अभाव में विक्षेपरहित सुख होता हे । जैसे चन्द्रमा में अमृत नहीं समाता वैसे ही विषय मननरहित और सम्पूर्ण विषयकौतुक से शून्य सुखरूपता को प्राप्त हुआ मन आत्मा में ही नहीं समाता