Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 2, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 2, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अथोवाच महातेजा राज्ञः पार्श्वे व्यवस्थितः ।
ब्रह्मेव ब्रह्मणः पुत्रो वसिष्ठो भगवान्मुनिः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीविश्वामित्रजी के यों कहने पर व्यास,
नारद आदि सम्पूर्ण मुनियोंने भी उनके कथन की साधुवादपूर्वक खूब प्रशंसा की | तदुपरान्त महाराज
दशरथ की बगल में बैठे हुए ब्रह्माजी के पुत्र अतएव ब्रह्माजी के समान महातेजस्वी महामुनि भगवान्
वसिष्ठजी बोले। भाव यह कि वसिष्ठ जी ब्रह्माजी के पुत्र थे, अतएव वे ब्रह्माजी के तुल्य महातेजस्विता
आदि गुणगणों से विभूषित थे, इसलिए दिव्य मुनियों की मण्डली के सम्मुख ब्रह्माजी की नाई बोले