Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 20, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 20, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
गुणाः शमादयो ज्ञानाच्छमादिभ्यस्तथा ज्ञता ।
परस्परं विवर्धन्ते ते अब्जसरसी इव ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
एक समय में परस्पर वृद्धि के अनुरूप दृष्टान्त को बतलाने के लिए उक्त वस्तु को ही पुनः
कहते हैं।
जैसे कमल के सौन्दर्य और शोभा आदि गुणों द्वारा सरोवर की और जल के शीतलता
आदि गुणों द्वारा कमल की परस्पर वृद्धि होती है, वैसे ही शम आदि गुणोंकी ज्ञान से और ज्ञान
की शम आदि गुणों से परस्पर अभिवृद्धि होती है