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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 20, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 20, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

न यावत्सममभ्यस्तौ ज्ञानसत्पुरुषक्रमौ । एकोऽपि नैतयोस्तात पुरुषस्येह सिध्यति ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, यहाँ जबतक ज्ञान ओर सदाचार का भली भाँति अभ्यास न किया जाय, तब तक उनमें से एक की भी पुरुष को सिद्धि नहीं होती