Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 5, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 5, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 5 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
वाल्मीकिरुवाच ।
इत्युक्तवत्यथ मुनौ दिवसो जगाम सायंतनाय विधयेऽस्तमिनो जगाम ।
स्नातुं सभा कृतनमस्करणा जगाम श्यामाक्षये रविकरेण सहाजगाम ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवाल्मीकिजी ने कहा : महामुनि श्रीवसिष्ठजी के यों कहने पर दिन बीत
गया और सूर्य भगवान अस्ताचल के शिखर पर गये । मुनिसभा महामुनि वसिष्ठजी को प्रणाम
कर सायं सन्ध्योपासना, अग्निहोत्र आदि करने के लिए स्नानार्थ चली गई ओर रात्रि बीतने पर
सूर्योदय होते-होते श्रीवसिष्ठजी के पास पुनः आ गई (>>)