Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण, सर्ग 9, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
द्विविधो वासनाव्यूहः शुभश्चैवाशुभश्च ते ।
प्राक्तनो विद्यते राम द्वयोरेकतरोऽथ वा ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त अर्थ का ही समर्थन करने के लिए वासनाओं का भेद दर्शा कर कहते हैं।
पूर्वजन्म की वासनाएँ, दो प्रकार की होती हैं, एक शुभ और दूसरी अशुभ । उनमें से
आपकी पूर्वजन्म की वासनाएँ या शुभ हो सकती हैं या अशुभ हो सकती हैं