Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 1, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 1, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
स तथाभूत एवात्मा स्वयमन्य इवोल्लसन् ।
जीवतामुपयातीव भाविनाम्ना कदर्थिताम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
अब सृष्टि के आरम्भ में उसका मिथ्याभूत समष्टिजीवभाव कहते हैं ।
चैतन्यस्वभाव वही आत्मा अज्ञान से अन्य-सा, जड़-सा अर्थात् आकाश आदि के
क्रम से उत्पन्न लिंगसमष्टिरूप होकर उसमें प्रवेश करने से “वही हूँ” इस अभिमान से
उसकी नाई प्रतीत होता हुआ भावी जीवनामसे गर्हित बनाई गई जीवता को भ्रान्ति से
प्राप्त-सा होता है