Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 1, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 1, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
जगद्दृश्यं तु यद्यस्ति न शाम्यत्येव कस्यचित् ।
नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
और दूसरी बात यह भी है कि यदि दृश्य स्वतः सत् माना जाय, तो सत् का बाघ न होने से
कभी भी मोक्ष नहीं हो सकेगा, ऐसा कहते हैं।
यदि जगत् की वास्तविक सत्ता है, तो किसी के जगत् की निवृत्ति नहीं होगी, क्योकि
असत् पदार्थ की सत्ता नहीं होती ओर सत् का अभाव नहीं होता, यह अकाट्य नियम हे