Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 10, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
महाभूतप्रकाशानामभावस्तम उच्यते ।
महाभूताभावजं तु तेनात्र न तमः क्वचित् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसीलिए “न प्रकाशः”
कहा हे । इससे वह कैसे भास्वर नहीं है 2“ इस प्रश्न का भी समाधान हो गया ।
अव "कर्थं वा न तमोरूपम्” ? इस तृतीय प्रश्न का समाधान करते हैं।
सूर्य आदि महाभूतो के अभाव से तम उत्पन्न होता है । पृथिवी आदि महाभूतो के प्रकाश
का विरोधी होता हुआ वह दूसरे के प्रकाश से प्रकाशित होनेवाले पृथिवी आदि में ही कहा जा
सकता हे अर्थात् “तम यह व्यवहार पृथिवी आदि में ही होता हे