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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 10, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 10, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 10 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

एवमित्थं महारम्भपूर्णमप्यजरं पदम् । अस्मद्दृष्ट्या स्थितं शान्तं शून्यमाकाशतोऽधिकम् ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण प्रश्नो का समाधान करने पर फलित अर्थका उपसंहार करते हैं । इस प्रकार महाभूत-भौतिक पदार्थसि पूर्ण भी जरामरणशून्य ब्रह्मतत्त्व हमारी दृष्टि से आकाश से भी अधिक शून्य ओर निर्विकार स्थित है