Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 101, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 101, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 101 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
कोऽपि मुग्धमतिर्बालो धात्रीं पृच्छति राघव ।
कांचिद्विनोदिनीं धात्रि वर्णयाख्यायिकामिति ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, किसी युक्तायुक्तविचारशून्य बालक ने अपनी
धाय से कहा : धाय, मन बहलानेवाली कोई कथा सुनाओ