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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 101, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 101, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 101 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

सा बालस्य विनोदाय धात्री तस्य महामते । आख्यायिकां कथयति प्रसन्नमधुराक्षरम् ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

महामते, उस बालक के मनोविनोद के लिए धाय ने सरल और कोमल पदों से युक्त आख्यायिका कही