Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 101, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 101, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 101 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
पताकापद्मिनीव्याप्तं नीलाकाशजलाशयम् ।
दूरश्रुतसमुल्लापगायन्नागरमण्डलम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
उस नगर में ऊपर तो पताकाएँ व्याप्त थी ओर नीचे कमलके
तालाब भरे हुए थे । नीले आकाश के सदृश सुन्दर जलाशय थे । उस नगर के नागरिकों के
दलके-दल गाना गा रहे थे, उनके स्वरों के आरोहावरोहक्रम दूर से ही सुनाई दे रहे थे