Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
आपतन्तु वपुःपद्मे सुखदुःखहिमश्रियः ।
आकाशोडुयनालीनां का नः क्षतिरुपस्थिता ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीर रूपी कमलमें सुख-दुःखरूपी तुषारपात भले ही होता रहे, उससे आकाश में उड़नेवाले
भ्रमररूपी हम लोगों की कौन हानि प्राप्त हुई ?