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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

देहः पततु वोदेतु यातु वा गगनान्तरम् । तद्विलक्षणरूपस्य कासौ भवति मे क्षतिः ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

देह चाहे गिर पड़े, चाहे उठ खड़ा हो अथवा दूसरे आकाश में चला जाय । मेरा स्वरूप तो उससे बिलकुल भिन्न है, अतः यह मेरी कौन- सी क्षति है