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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

संसारेऽस्मिन्विहरतो मनोऽपि हि न नश्यति । ज्ञानाग्निना विना जन्तोरात्मनाशे तु का कथा ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

इस संसार मे विचरण कर रहे (आवागमनरत) प्राणी का ज्ञानरूपी अग्नि के बिना मन तक नष्ट नहीं होता, आत्मा के विनाश की तो कथा ही क्या है ?