Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 37
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 102, verse 37 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
स्वयं संकल्पमात्रेण स्वविनाशदृशामिदम् ।
मनः संसाधयत्याशु क्लेशो नात्रोपयुज्यते ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
मन के विनाश का उपाय खोज रहे विवेकी
पुरुषों के मनोनाश को मन स्वयं अपने संकल्प से शीघ्र सिद्ध कर देता है, मनोनाश के लिए
तपस्या आदि क्लेश उपयोगी नहीं हैं