Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 104, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 104 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
सच्छायस्योन्नतांसस्य फलिनः पुष्पभासिनः ।
स विवेश पुरो राज्ञस्तरोरग्रे कपिर्यथा ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे छायादार, ऊँचे तनेवाले, फूलों से सुशोभित और फलों से
लदे हुए वृक्ष के आगे बन्दर प्रवेश करता है वैसे ही वह सुन्दर कान्तिवाले, उन्नत कन्धेवाले,
फूलों से सुशोभित हो रहे तथा फलशाली राजा के सामने प्रविष्ट हुआ