Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 104, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 104 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
स ननाम महीपालं शिखरोदारकन्धरम् ।
पादोपान्तगतः कान्तं शैलं फलतरुर्यथा ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पर्वत के समीप के छोटे पर्वत
में स्थित फलों से लदा हुआ वृक्ष जिसकी ऊपर की भूमि भली मालूम होती है ऐसे सुन्दर पर्वत
को प्रणाम करता है वैसे ही मुकुट से जिसकी गर्दन सुशोभित हो रही थी ऐसे सुन्दर राजा को
उसने प्रणाम किया