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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 104, Verse 43

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 104, verse 43 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 104 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

तस्थौ मुहूर्तयुग्मं स ध्यानासक्त इवात्मनि । वीतरागो मुनिः क्षुब्धः परानन्द इव स्थितः ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

दो मुहूर्त तक राजा आत्मा में ध्यानासक्त के समान ऐसे स्थित हुआ जैसे कि वीतराग और बाह्यदृष्टि शून्य मुनि परमानन्द में स्थित होता है