Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 105, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 105 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
अथैनं परिपप्रच्छुः पुरोगा मन्त्रिणस्तथा ।
प्रलयोल्लाससंत्रस्तं मार्कण्डेयमिवामराः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर जैसे प्रलयकाल में भयभीत श्री मार्कण्डेय
मुनिजी से देवता पूछते है हैं वैसे ही सन्मुखवर्ती मन्त्रियों ने राजा से पूछा