Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 106, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 106, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 106 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
याच्चयापि तया मह्यमित्थं दत्तं न किंचन ।
यत्नप्रार्थनया लक्ष्म्या यथा दुष्कृतिने धनम् ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे लक्ष्मी
प्रयत्नपूर्वक की गई प्रार्थना से पापी को धन नहीं देती है वैसे ही मेरी इस प्रकार की प्रार्थना से
भी उसने मुझे कुछ नहीं दिया