Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 107, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 107, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 107 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
यामिन्यो विपिने क्लिन्ने वराहामिषभोजनाः ।
शिलातलकुटीकोशे नीता जलदविक्लवाः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
भीगे हुए जंगल में पाषाणो की
गुफारूपी कुटियों में मेघ से भीषण वे रात्रियाँ बीती जिनमें एकमात्र वराह का मांस ही भोजन
को मिलता था