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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 108, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 108, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 108 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

राजोवाच । अथ गच्छति कालेऽत्र जराजर्जरितायुषि । तुषारपूर्णशष्पौघसमश्मश्रुभृते मयि ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

राजा ने कहा : हे सभासद्वृन्द, तदनन्तर क्रमशः समय बीतने पर मेरी आयु वृद्धावस्थासे जर्जरित हो गई, मेरा मुँह तुषार से लदे हुए घास के तिनको के तुल्य सफेद दाढ़ी-मूँछ से आच्छन्न हो गया

सर्ग सन्दर्भ

एक सौ सातवाँ सर्ग समाप्त एक सौ आठतवाँ सर्ग राजा के चण्डालो की उस बस्ती में बहुत वर्षो तक निवास करते समय अनावृष्टि से उत्पन्न दुर्भिक्ष से देश की दुर्दशा का वर्णन |