Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 109, Verses 15–16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 109, verses 15–16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 109 · श्लोक 15,16
संस्कृत श्लोक
अथ वात्सल्यमूढेन मया दुःखातिभारिणा ।
तस्योक्तं पुत्र मन्मांसं पक्वं संभुज्यतामिति ॥ १५ ॥
तदप्यङ्गीकृतं तेन देहीति वदता पुनः ।
मन्मांसभक्षणं क्षीणवृत्तिनाऽऽश्लेषवृत्तिना ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त पुत्र के प्रति गहरे स्नेह से मूढ बने हुए अतएव अत्यन्त दुःखी
मैंने उससे कहा : बेटा, पका हुआ मेरा मांस खाओ । फिर “दो कहकर अत्यन्त भूखे और
मेरे शरीर से चिपक रहे उसने मेरा मांस खाना भी स्वीकार कर लिया