Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 109, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 109, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 109 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
मनोविलासः संसार इति यस्यां प्रतीयते ।
सर्वशक्तेरनन्तस्य विलासो हि मनोजगत् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
विलासरूपी मन ही जगत् हे