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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 109, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 109, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 109 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

अहं तु तान्परित्यज्य श्वशुरादीन्स्वकं क्षमम् । कलत्रमात्रमादाय कृच्छ्राद्देशाद्विनिर्गतः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं तो उन श्वसुर आदि मित्रों को छोड़कर मेरे पीछे चल सकने में समर्थ केवल अपने कुटुम्ब को लेकर बड़ी कठिनाई से उस दुर्भिक्ष पीड़ित देश से निकल आया