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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 109, Verse 5

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 109, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 109 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

प्रविष्टाः केचिदनलं ज्वलितं शलभा इव । केचिच्श्वभ्रेषु पतिताः शिला शैलच्युता इव ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

पतंगों की नाई कोई लोग जली हुई आग में प्रविष्ट हो गये, कोई पहाड़ से लुढकी हुई शिलाओं की भाँति गड्ढो में गिर गये