Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 11, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 11, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
दृश्यं चेत्संभवत्यादौ पश्चात्क्षयमुपालभेत् ।
तद्दृश्यस्मरणानर्थरूपो बन्धो न शाम्यति ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे कि दृश्य के आत्यन्तिक क्षयका परिज्ञान भले न हो। उसकी क्या आवश्यकता
है ? किन्तु उत्पन्न हुए द्रश्यका विद्यासे विनाश हो, इस पर कहते हैं।
यदि दृश्य प्रपंच की पहले उत्पत्ति और पीछे उसका विनाश मानो, तो संस्काररूप से
स्थित दृश्य का पुनः पुनः उद्भवरूप अनर्थकारी बन्ध कभी विनष्ट ही नहीं हो सकता