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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 11, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 11, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

यत्र क्वचन संस्थस्य स्वादर्शस्येव चिद्गतेः । प्रतिबिम्बो लगत्येव सर्वस्मृतिमयो ह्यलम् ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

दृश्यप्रदेश के परित्याग से ही दृश्य के असम्भव की उपपत्ति हो अर्थात्‌ जहाँ पर दृश्य नहीं है, वहाँ पर दृश्य के असम्भव की उपपत्ति हो, इस शंका का समाधान स्वयं आप ही पहले कर चुके हैं, ऐसा कहते हैं। जैसे स्वच्छ दर्पण चाहे कहीं पर भी स्थित क्यों न हो, उसमें प्रतिबिम्ब पड़ता ही है, वैसे ही चेतन्याश्रय द्रष्टा में सर्वस्मृतिमय प्रतिबिम्ब अवश्य पड़ता ही है