Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 110, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

येन च्छिन्ना विचारेण जीवस्य ज्ञेयवासना । निरभ्रस्येव सूर्यस्य तस्यालोको विराजते ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस विचार ने जीव की ज्ञेय पदार्थो की वासना का उच्छेद किया, मेघो के आवरण से रहित सूर्य के प्रकाश के तुल्य उसका प्रकाश विराजमान है