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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 110, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

मनो मोहमुपादत्ते यस्यासौ मूढ उच्यते । शरीरे मोहमापन्ने न शवो मूढ उच्यते ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसका मन मोह को प्राप्त होता है, वह मूढ कहा जाता है । शरीर के मोह को प्राप्त होने पर शव को कोई मूढ नहीं कहता है