Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 110, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
असदेव मनोवृत्तिर्म्लाना विस्तारयत्यलम् ।
दुःखं दोषसहस्रेण वेतालानिव बालिका ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार अति तुच्छ वासनारूपी सहत्त्रों दोषों से म्लान हुई मनोवृत्तिरूप से
स्थित वह चिति जैसे बालिका वेतालो का विस्तार करती है वैसे ही असत् ही दुःखों का खूब
विस्तार करती है