Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 110, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 110, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 110 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
शत्रुत्वं शङ्कते मित्रे कलङ्कमलिनं मनः ।
मदाविष्टमतिर्जन्तुर्भ्रमत्पश्यति भूतलम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
कलंक से (वासनाओं से)
मलिन हुआ मन मित्र में शत्रुत्व की शंका करता हे । देखिये न ! नशे में चूर हुआ प्राणी पृथिवी
को घूमती हुई देखता है