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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 111, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

स्वायत्तं च सुसाध्यं च स्वचित्ताक्रान्तिमात्रकम् । शक्नुवन्ति न ये कर्तुं धिक्तान्पुरुषजम्बुकान् ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

जो लोग केवल अपने चित्त का निग्रह नहीं कर सकते, जो कि स्वाधीन ओर सहज साध्य है, वे पुरुषों में गीदड है, उनको बार-बार धिक्कार हे