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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 111, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उत्पत्ति प्रकरण, सर्ग 111, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 111 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

स्वपौरुषैकसाध्येन स्वेप्सितत्यागरूपिणा । मनःप्रशममात्रेण विना नास्ति शुभा गतिः ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

एकमात्र अपने पौरुष से प्राप्त होने वाले अपने अभीष्ट का परित्याग रूपी मन के निग्रह मात्रके बिना शुभ गति नहीं है